दर्पण के सामने

 मैं  बहुत देर से 

दर्पण के सामने 

खड़ा उls निहार रहा था।

दर्पण कम ,

 अपने चेहरे पर उतर आई

रेखांए, उम्र के कर्व को मन में उतार रह था।

धीरे- धीरे मन ने चेहरे से कहा -

आई लव यू  । 

जीवन के ६४ साल 

के सफर में,

तुम्ही ते रहे मेंरे साथी,

मरे सखा। मेरे हमसफर ।

रोशनी हो या अंध्ेारा,

गर्मी  हो या सर्दी।

बारिश हो या धूप।

हर हाल में तुम्ही तो मेरे साथ रहे हो।

 तुम्ही तो हो मेरे एक मात्र विश्वस्त साथी












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