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अशोक मधुप के दोहे

  अशोक   मधुप के दोहे   मौला !कैसी है करी ? ये दिल के दरम्यान , धीरे -धीरे मन बॅटे , अब बॅट गए मकान। 2 −चश्मा भी लो सज गया , उड़े चाँद से बाल।   देखो बढ़ती उम्र ने , क्या क्या किया कमाल। 3 −रात बिताई जाग के , दिवस बिताया सोय। कोरोना का दौर है , उलटा सीधा होय। 4 −आते जाते ही रहे , बड़े-बड़े तूफान । पर इन पर जीता सदा , एक फकत इंसान। 5 − हारेगी यह आपदा , जीतेगा संसार। थोड़ा सा आराम कर , घर में ही रह यार   6−समझ न आवे अब सखे! , क्यों ऐसे हालात ? सोते-सोते दिन कटे , जागे कटती रात। 7−ना तन में ताकत रही , ना   अब बल है पांव। कैसे आते फिर सखे! हम यौवन के गांव। 8-रहें कहीं भी शहर में , या महलों की छाँव। भूल कभी पाए नहीं , अपना घर औ गाँव। 9− होली के हालात हैं , घर में बैठो मीत। कोरोना के खौफ में , दूर- दूर से प्रीत। 10,प्रेम प्यार में जो पंगा , बना कबीरा सूर। जहर पान करते रहे , मीरा ओ मंसूर।   11- : कैसे फिर से रास हो , अब यमुना के तीर , ना अब वो गोपी रहीं , ना यमुना का नीर।   12,अर्थ बहुत चिंतित ...